Modi Government ने साफ किया कि Old Pension Scheme (OPS) बहाल नहीं होगी। जानिए OPS vs NPS vs UPS में क्या फर्क है, कर्मचारियों की मांग क्या है और सरकार का ताज़ा अपडेट।
Old Pension Scheme 2025: मोदी सरकार का बड़ा ऐलान | OPS vs NPS vs UPS पूरी जानकारी
भारत में सरकारी कर्मचारियों के बीच Old Pension Scheme (OPS) को बहाल करने की मांग लंबे समय से चल रही है। यह मुद्दा बार-बार संसद से लेकर सड़क तक उठता रहा है। हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में साफ कहा कि फिलहाल OPS बहाल करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इस बयान के बाद कर्मचारियों में फिर से असंतोष फैल गया है और उन्होंने इसे अन्याय बताया है।
OPS क्यों है खास?
पुरानी पेंशन स्कीम यानी OPS को सरकारी कर्मचारी अपने लिए सबसे सुरक्षित मानते हैं। इसमें रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी को उसकी आखिरी सैलरी का 50% पेंशन मिलता था। साथ ही, यह पेंशन लाइफटाइम गारंटी के साथ होती थी और कर्मचारी के परिवार को भी सुरक्षा देती थी। इसके उलट, NPS (National Pension Scheme) मार्केट से जुड़ा हुआ है और इसमें पेंशन की राशि तय नहीं होती। यही वजह है कि कर्मचारी बार-बार OPS बहाली की मांग करते रहे हैं।
सरकार का तर्क: OPS से बढ़ेगा बोझ
सरकार का कहना है कि OPS लागू होने पर राजकोषीय बोझ (Fiscal Burden) बढ़ जाएगा। आज औसत आयु पहले से अधिक है और लोग 80–90 साल तक जी रहे हैं। इस स्थिति में हर साल लाखों कर्मचारियों को पेंशन देना खजाने पर बड़ा असर डालेगा।
उदाहरण के लिए, राजस्थान जैसे राज्यों में बजट का लगभग 14% हिस्सा सिर्फ पेंशन में खर्च हो रहा है। अगर OPS पूरे देश में बहाल किया गया तो विकास कार्यों के लिए पैसे की कमी हो जाएगी।
OPS मौत और विकलांगता पर मिल सकती है, तो रिटायरमेंट पर क्यों नहीं?
कर्मचारी संगठन सरकार से सवाल करते हैं कि अगर NPS कर्मचारी की मौत या विकलांगता पर OPS जैसी पेंशन दी जा सकती है, तो रिटायरमेंट पर क्यों नहीं?
डॉ. मंजीत सिंह पटेल, राष्ट्रीय अध्यक्ष – नेशनल मिशन फॉर OPS, का कहना है कि 1 दिन नौकरी करने वाले कर्मचारी को भी मौत या दिव्यांगता पर OPS मिल सकती है, तो रिटायरमेंट पर रोक क्यों?
सांसद और जज को पेंशन, तो कर्मचारी क्यों नहीं?
कर्मचारियों का यह भी कहना है कि सांसद और विधायकों को सिर्फ 5 साल सांसद रहने पर ₹25,000 मासिक पेंशन मिलती है। इसके अलावा जजों को भी पेंशन का पूरा लाभ मिलता है। लेकिन सरकारी कर्मचारी, जो 30–35 साल नौकरी करते हैं, उन्हें यह सुविधा क्यों नहीं दी जा रही?
NPS और UPS की हकीकत
देश में इस समय 98 लाख कर्मचारी NPS के दायरे में हैं, जिनमें से 27 लाख केंद्रीय और 71 लाख राज्य कर्मचारी हैं। इनके फंड का आकार ₹15.5 लाख करोड़ है। यह पैसा LIC, SBI और UTI जैसी बड़ी संस्थाओं में निवेश है।
सरकार ने हाल ही में Unified Pension Scheme (UPS) लाने की कोशिश की, लेकिन यह कर्मचारियों को पसंद नहीं आई। 30 लाख कर्मचारियों में से केवल 31,000 ने UPS चुना है। वजह यह है कि इसमें पेंशन आखिरी सैलरी पर नहीं, बल्कि पिछले 12 महीने की औसत सैलरी पर आधारित है और सरकार इसमें कर्मचारी का बड़ा हिस्सा अपने पास रख लेती है।
कर्मचारियों का तर्क: NPS फंड से OPS संभव
कर्मचारी कहते हैं कि OPS कोई बोझ नहीं है।
- 4600 ग्रेड-पे वाला कर्मचारी अगर 34 साल नौकरी करता है, तो उसके NPS खाते में लगभग ₹3.36 करोड़ जमा हो जाता है।
- इस रकम से हर महीने लगभग ₹2 लाख पेंशन बन सकती है।
- OPS में सरकार को सिर्फ ₹25,000 पेंशन देनी है।
इसलिए उनका तर्क है कि NPS का पैसा OPS बहाल करने के लिए पर्याप्त है।
स्पष्ट है कि OPS बनाम NPS की बहस अभी खत्म नहीं हुई है। सरकार कहती है कि OPS से खजाने पर बोझ बढ़ेगा, जबकि कर्मचारी इसे अपने अधिकार और भविष्य की सुरक्षा के रूप में देखते हैं। UPS भी कर्मचारियों को रास नहीं आ रहा है।
आने वाले समय में यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक रंग ले सकता है। क्योंकि लाखों कर्मचारी अब भी OPS की बहाली को लेकर सरकार पर दबाव बनाए हुए हैं।
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