शॉकिंग! बिहार में वोट चोरी का बड़ा खेल: राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की यात्रा ने उजागर की सनसनीखेज सच्चाई, चुनाव आयोग पर सवाल

By Shekhar

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शॉकिंग! बिहार में वोट चोरी का बड़ा खेल: राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की यात्रा ने उजागर की सनसनीखेज सच्चाई, चुनाव आयोग पर सवाल
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शॉकिंग! बिहार में वोट चोरी का बड़ा खेल: राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की यात्रा ने उजागर की सनसनीखेज सच्चाई, चुनाव आयोग पर सवाल

: बिहार के सासाराम से शुरू हुई वोट अधिकार यात्रा में खुलासा- लाखों वोटरों के नाम कटे, फर्जीवाड़ा का आरोप! राहुल-तेजस्वी की सभा में लोगों ने साझा किए प्रूफ, क्या ये लोकतंत्र की सबसे बड़ी साजिश है? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

बिहार की राजनीति में इन दिनों एक मुद्दा छाया हुआ है- वोट चोरी! जी हां, आपने सही पढ़ा। जहां एक तरफ देश भर में चुनावी सरगर्मियां तेज हैं, वहीं बिहार में विपक्षी नेता राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने एक ऐसी यात्रा शुरू की है जो सीधे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है। सासाराम से शुरू हुई इस ‘वोट अधिकार यात्रा’ ने पूरे राज्य को हिला दिया है। पत्रकार अजीत अंजुम की ग्राउंड रिपोर्ट से पता चलता है कि कैसे लाखों वोटरों के नाम मतदाता सूची से गायब हो गए हैं, और ये आरोप लगाए जा रहे हैं कि ये सब भाजपा की मिलीभगत से हो रहा है। क्या ये लोकतंत्र की जड़ों पर वार है? आइए विस्तार से जानते हैं इस सनसनीखेज घटनाक्रम को।

17 अगस्त 2025 को बिहार के सासाराम में एक बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम हुआ। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की अगुवाई में ‘वोट अधिकार यात्रा’ की शुरुआत हुई। ये यात्रा करीब 22 जिलों से गुजरेगी, 1500 किलोमीटर का सफर तय करेगी और दर्जनों विधानसभा क्षेत्रों को कवर करेगी। नारा है- ‘वोट चोर गद्दी छोड़’। मुख्य मुद्दा है एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) में हुई अनियमितताएं, फर्जी वोटरों का नाम जोड़ना और असली वोटरों के नाम काटना। अजीत अंजुम, जो खुद इस मुद्दे पर रिपोर्टिंग कर चुके हैं और जिनके खिलाफ बेगूसराय में एफआईआर भी दर्ज हुई है, ने सासाराम में लोगों से बात की और कई चौंकाने वाले खुलासे किए।

सासाराम के बीएडा ग्राउंड पर हजारों लोग जुटे। कांग्रेस, आरजेडी और माले के कार्यकर्ता और समर्थक नारे लगा रहे थे। अंजुम ने कई लोगों से बात की, जिन्होंने अपने इलाकों में वोट चोरी के प्रूफ दिखाए। एक कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष ने बताया कि तराड़ी विधानसभा में 500 फर्जी वोट पाए गए हैं। बैकवर्ड क्लास के वोटरों के नाम सूची से गायब कर दिए गए। उन्होंने कहा, “हम खुद 300-350 बूथों पर गए, बीएलओ से मीटिंग की, एसडीओ से बात की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं। नए 18 साल के युवाओं और बहुओं के नाम नहीं जोड़े जा रहे।” उनके पास प्रूफ थे, जिन्हें उन्होंने मोबाइल में दिखाया।

एक अन्य व्यक्ति सीमांचल के किशनगंज से आया था। उसने बताया कि बूथ नंबर 215 में राजद, माले और कांग्रेस के मतदाताओं के नाम नहीं चढ़ाए गए। बीएलओ और इआरओ पर आरोप लगाया कि वे भाजपा विधायक के इशारे पर काम कर रहे हैं और आरएसएस से जुड़े हैं। यहां तक कि नट कम्युनिटी के लोगों को बांग्लादेशी बताकर नाम काट दिए गए। फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट से ये खुलासा हुआ। एक और वोटर दानापुर से था, जिसने कहा कि जीवित लोगों को मृत घोषित कर दिया गया। “हमारे पास नामों की लिस्ट है, पार्टी कार्यालय में जमा की है।”

सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस मुद्दे पर एक बड़ा टर्निंग पॉइंट है। कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि 65 लाख नामों की लिस्ट अपलोड की जाए, जिसमें से 37 लाख परमानेंट शिफ्टेड या एब्सेंट हैं। कोर्ट ने आधार कार्ड को भी पहचान पत्र के रूप में मान्य किया, जबकि चुनाव आयोग इसे नागरिकता का प्रमाण नहीं मानता था। योगेंद्र यादव ने सुप्रीम कोर्ट में दो ‘मृतकों’ को जिंदा खड़ा कर दिखाया था, जो अब स्वस्थ हैं। विपक्ष का आरोप है कि ये टारगेटेड तरीके से किया गया है- गरीब, दलित, पिछड़े वर्ग के वोटरों को निशाना बनाया गया ताकि भाजपा को फायदा हो।

अंजुम ने अमेठी से आए लोगों से भी बात की, जो राहुल गांधी के समर्थन में आए थे। एक महिला पूजा राय ने बताया कि मऊ जनपद में उनके और उनके पति का वोट कट गया था। “उपचुनाव में न्यूजपेपर में आया था, लेकिन कोई रीजन नहीं बताया गया।” पटना से आए आरजेडी नेता नंदू यादव ने कहा कि दानापुर विधानसभा में बहुत सारे नाम कटे हैं। “जीवित को मृत कर दिया, मृत को जिंदा। हमने पार्टी में लिस्ट जमा की है।”

कैमूर जिले के दुर्गावती से आए मनोज राजभर ने बताया कि बूथ स्तर पर जिंदा लोगों को मृत घोषित किया गया। रामगढ़ विधानसभा से आए लोगों ने कहा कि बीएलओ घर नहीं आते, इसलिए नाम कट जाते हैं। भागलपुर के कहलगांव से प्रवीण सिंह कुशवाहा ने एक लिस्ट दिखाई, जिसमें 15 जिंदा लोगों को मृतक लिस्ट में डाला गया था। उन्होंने बीएलओ से जुगाड़ कर ये लिस्ट निकाली। लिस्ट में फोन नंबर, एपिक नंबर और बूथ नंबर सब थे। अंजुम ने फोटो खींचकर चेक करने का वादा किया।

अरवल जिले से आए लोगों ने बताया कि 31,000 नाम कटे हैं, ज्यादातर गरीब और वीकर सेक्शन के। “ऑनलाइन आवेदन रोक दिया गया, ओटीपी नहीं आता। ब्लॉक में 500 रुपये रिश्वत मांगी जाती है।” एक व्यक्ति ने कहा कि उनके गांव हृदय चक में 1800 वोट कटे। औरंगाबाद से आए कांग्रेस नेता अरविंद शर्मा ने बताया कि उनके इलाके में 65,000 वोट कटे, जिनमें 7,000-7,500 जेन्युइन हैं। “महागठबंधन के वोटरों को टारगेट किया गया।”

विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है। चुनाव आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राजनीतिक दलों ने समय पर सूचना नहीं दी, लेकिन विपक्ष पूछता है- “साफ वोटर लिस्ट बनाना आयोग का काम है, हमारा नहीं।” राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये मुद्दा उठाया गया। भाजपा इसे विपक्ष की हताशा बता रही है, लेकिन ग्राउंड पर लोग गुस्से में हैं।

ये यात्रा बिहार की राजनीति को बदल सकती है। अगर 7 करोड़ 24 लाख वोटरों में से लाखों नाम गलत कटे, तो चुनाव निष्पक्ष कैसे? विपक्ष का दावा है कि ये क्रिमिनल कनावेंस है, जिसमें चुनाव आयोग और सरकार शामिल हैं। जनता इस मुद्दे को कितना गंभीरता से लेगी, ये आने वाला समय बताएगा। लेकिन सासाराम की ये सभा दिखाती है कि वोट चोरी अब चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है।

अजीत अंजुम ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि वो अगले दिनों बिहार में रहेंगे और प्रभावित वोटरों से मिलेंगे। उनका व्हाट्सएप नंबर शेयर किया गया ताकि लोग प्रूफ भेज सकें। ये घटना न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश के लोकतंत्र पर सवाल उठाती है। क्या चुनाव आयोग जवाब देगा? या ये साजिश जारी रहेगी? इंतजार कीजिए, क्योंकि ये कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।


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