26 अगस्त की रात बनी तबाही की रात: बारिश ने डुबो दिया शहर, हजारों घर बर्बाद
26 अगस्त की रात शहर पर मानो आफत बनकर टूटी। घंटों तक हुई तेज बारिश ने ऐसा कहर बरपाया कि पूरा इलाका जलमग्न हो गया। नालों और नालियों से उफनकर आया पानी सड़कों से होते हुए सीधे लोगों के घरों में घुस गया। देखते ही देखते मोहल्ले-मोहल्ले तालाब में बदल गए और चारों ओर कीचड़, मलबा और गंदा पानी ही नजर आने लगा।
हजारों घरों को भारी नुकसान
बारिश का असर कितना बड़ा था, यह अगले दिन के आंकड़े बताते हैं। प्रशासन के मुताबिक 6000 से ज्यादा घरों में पानी घुस गया, लगभग 1000 घरों में मलबा भर गया और करीब 150 घरों की दीवारें टूट गईं या उनमें गहरी दरारें पड़ गईं। तहसीलदार और नायब तहसीलदार स्तर के अधिकारी हर घर जाकर नुकसान का आकलन कर रहे हैं। दावा किया गया है कि रिपोर्ट तैयार होते ही प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा। लेकिन घटना को 4 दिन गुजरने के बाद भी कई घरों के आंगन मलबे से भरे पड़े हैं।
गरीब परिवारों पर सबसे बड़ी मार
जिनके पास पहले ही सीमित साधन थे, उनके लिए यह बारिश किसी दुःस्वप्न से कम नहीं रही। घरों में रखा फर्नीचर, फ्रिज, टीवी, लैपटॉप, अलमारी, बिस्तर और रोजमर्रा का सामान सब पानी में डूबकर खराब हो गया। तालाब तिल्लों में इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान चलाने वाले श्याम सिंह बताते हैं कि लोग लगातार खराब टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और मोबाइल लेकर आ रहे हैं। वे कहते हैं, “हम जितना हो सकता है सामान ठीक करके लौटा रहे हैं, लेकिन कई चीजें पूरी तरह बेकार हो चुकी हैं।”
फर्नीचर और गाड़ियां भी डूब गईं
जहां पानी 2-3 फुट तक घरों में भर गया था, वहां लकड़ी और प्लाईवुड से बने फर्नीचर ने सबसे ज्यादा नुकसान झेला। बेड की सतहें उखड़ गईं और अलमारियां पूरी तरह खराब हो गईं। इतना ही नहीं, शहर भर में करीब 200 वाहन तकनीकी खराबी के शिकार हुए और 50 से ज्यादा गाड़ियों पर पेड़ और मलबा गिरने से सीधा नुकसान हुआ। वार्ड 31 के पूर्व पार्षद सुच्च सिंह और वार्ड 19 के पूर्व पार्षद अमित गुप्ता के मुताबिक, कई गाड़ियां पानी में डूबे रहने से अब स्टार्ट तक नहीं हो रही हैं।
निचले इलाकों में तबाही ज्यादा
वार्ड 32, 61 और 72 जैसे निचले इलाकों में हालात सबसे ज्यादा भयावह रहे। खेतों से बहकर आया पानी सीधे घरों में घुस गया। लोग अपना सामान तक नहीं बचा पाए। आज भी कई मोहल्लों में लोग मलबा हटाने और घरों की सफाई में जुटे हैं।
नगर निगम पर लापरवाही के आरोप
कई पूर्व पार्षदों ने नगर निगम पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि पहले ही चेताया गया था कि भारी बारिश से हालात बिगड़ सकते हैं, लेकिन नालों की सफाई और गहरीकरण जैसे जरूरी काम अधूरे छोड़ दिए गए। वार्ड 74 के शौकत अली, 73 के प्रो. युद्धवीर सेठी, 75 के घास सिंह, 28 के गौरव चोपड़ा और 71 की शमा अख्तर ने आरोप लगाया कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर करोड़ों खर्च होने के बावजूद शहरवासी राहत महसूस नहीं कर पा रहे हैं।
प्रशासन का दावा और लोगों का सवाल
प्रशासन का दावा है कि राहत और बहाली का काम तेज है। ज्यादातर इलाकों से पानी निकाल दिया गया है और सफाई चल रही है। लेकिन लोग पूछ रहे हैं कि – क्या हर साल बारिश के साथ यही हालात दोहराए जाएंगे? क्या शहरवासी हमेशा डर में जीएंगे कि तेज बारिश मतलब उनके घरों और सामान की तबाही?
फिलहाल लोग अपने टूटे घरों और बर्बाद सामान के बीच खड़े हैं। उम्मीद यही है कि सरकार सिर्फ मुआवजा बांटकर हाथ न झाड़े, बल्कि लंबे समय के लिए कोई ठोस समाधान निकाले।
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